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तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती लेवल 1 के परिणाम के बाद बेरोजगारों में बड़ा रोष, रीट के प्रमाण पत्र की 3 साल की वैधता के कारण पहले से चयनितों का हो रहा दुबारा चयन,बेरोजगारों को नही मिल रहा मौका,बने नियम तो कट ऑफ आएगी 3 से 4 अंक कम, देखे बड़ी खबर

बीकानेर
रीट लेवल 1 के माध्यम से हो रही तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2018 की कटऑफ जारी होने के बाद बेरोजगारों में रोष उत्पन्न हो गया है बीकानेर निदेशालय द्वारा जारी कटऑफ में पूर्व के चयनित शिक्षकों के दोबारा चयन होने से एवं बेरोजगारों को मौका नहीं मिलने के कारण बेरोजगारों में भारी रोष है बीकानेर निदेशालय द्वारा 2 दिन पूर्व जारी की गई तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती लेवल-1 की कटऑफ में पूर्व की रीट2015 एव टेट 2012 के प्रमाण पत्र के आधार पर चयनित हुए अभ्यर्थियों में करीब 6 से 7000 पूर्व में लगे शिक्षक बताए जा रहे हैं जिससे कई बेरोजगारों को चयन से वंचित रहना पड़ा है।
इस मामले से जुड़ी आज की बड़ी खबर एवं सम्पूर्ण जानकारी के लिए इस लिंक पर जाए।

https://youtu.be/7XGqkGMDh3Q
राजस्थान में सरकार द्वारा लेवल फर्स्ट के 26000 पदों पर भर्ती का आयोजन किया जा रहा है जिसके लिए बीकानेर निदेशालय ने 2 दिन पूर्व ही कट ऑफ जारी की थी लेकिन वास्तविकता देखें तो यह 1 तरीके से एक ही शिक्षक का दोबारा शिक्षक के पद पर चयन हो रहा है जिससे यह भर्ती सिमटकर 15000 पदों पर हिमानी जा रही है क्योंकि बेरोजगारों को चयन से हाथ धोना पड़ रहा है 2 दिन पूर्व जारी कट ऑफ लिस्ट में कई हजारों की संख्या में ऐसे व्यक्तियों के नाम है जो गृह जिला पाने के लिए दोबारा से आवेदन करके चयनित हुए है।
अभ्यर्थियों की लिस्ट इस लिंक पर जाकर देखें।

http://www.education.rajasthan.gov.in/elementary
रीट प्रमाण पत्र की 3 साल की वैद्यता होने के कारण शिक्षा विभाग में इस तरह की स्थिति देखने को मिल रही है जिसके लिए बेरोजगार नियमों में बदलाव के लिए मंत्रियों एवं अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं बेरोजगारों की मांग है कि एक प्रमाण पत्र के माध्यम से एक बार चयन होने के बाद उसी पद पर दोबारा उस प्रमाण पत्र को माना ना जाए जिससे अधिक से अधिक बेरोजगारों को रोजगार मिल सके।
तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती के चयनितों की लिस्ट देखने के लिए इस लिंक पर जाए।

http://education.rajasthan.gov.in/content/raj/education/elementary-education/hi/TR2018/teacher-recruitment-2018-level-i.html
इस मामले को लेकर आज के बेरोजगार शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी के आवास पर पहुंचे लेकिन बेरोजगारों की शिक्षा मंत्री से वार्ता नहीं हो सकी
 शिक्षा मंत्री के आवास पर बेरोजगार ने प्रकट किया रोष खबर के लिए इस लिंक पर जाएं।

https://twitter.com/zeerajasthan_/status/1003510535319478272?s=17
राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेन यादव ने बताया कि सरकार को नियमों में बदलाव करना चाहिए जिससे अधिक से अधिक बेरोजगारों को मौका मिलेगा बदलाव नहीं करने के कारण कई बेरोजगारों को रोजगार मिलने से वंचित होना पड़ रहा है यह एक विडंबना का विषय है इस पर सरकार को सोचने की जरूरत है क्योंकि बेरोजगारों में इस तरह के नियमों से रोष उत्पन्न हो रहा है।
परिणाम में कट ऑफ में हुए परिवर्तन और संसोधित परिणाम से जुड़ी खबर एव कट ओर लिस्ट के लिए इस लिंक पर जाए

http://www.rajbem.tk/2018/06/1.html?m=1

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3 Comments
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  1. मैं इस मुद्दे का समर्थन करता हूं। यह बिल्कुल गलत है कि जिन लोगों को नौकरी की ज्यादा जरूरत है उन्हें नौकरी न मिलकर उन्हें मिल रही है जो पहले से नौकरी लगे हैं उसी पद पर।
    किन्तु मैं उन पोस्टेड भाईयों के समर्थन में भी एक बात कहूंगा कि वो नौकरी लगे थे इसलिए ताकि वो अपने घर वालों की जरूरतों को पूरा कर सकें और सबके साथ खुश रह सके लेकिन उन्हें तो इन सबसे दूर कर दिया गया और नौकरी दी गई। अब वो घर से दूर रहकर नौकरी करके क्या करेगा जब वो अपने मां बाप की और अपनों की सेवा नहीं कर सकता।
    अब लोग कहेंगे कि क्या फोजी पागल है जो सब कुछ छोड़कर बार्डर पर नौकरी कर रहे हैं तो मेरा एक ही जवाब है कि शिक्षक की नौकरी पोस्टेड भाईयों ने इसीलिए चुनी ताकि वो सबके साथ रहकर अपना सहयोग दें नहीं तो घर से दूर ही रहना है तो वो भी फौज में जाते।
    सरकार से मेरा एक ही सवाल है कि क्यों गृह जिले में या उसके आसपास पद रिक्त होते हुए भी एक बेटे एक भाई को उसके अपनो से दूर कर इतनी दूर दूर स्थानों पर नौकरी दी जाती है कि वह बार एक ही पद पर आवेदन करने को मजबूर हो जाता है।
    और जब घर दूर रहकर उसके सारे जज्बात मर जाते हैं और वह मां बाप के पास रहना पसन्द नहीं करता तो फिर क्यों लोग और सरकार बेटों को नालायक कहती हैं
    और बाद में जब ट्रांसफर होते हैं तो भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जाता है।
    तो फिर पोस्टेड की क्या गलती है कि उसे बचपन से कुछ बनने का सपना दिखाया गया और बाद में जब वो कुछ बन गया तो उसे सबसे दूर कर दिया
    और अब वो बच्चों को क्या सिखाये कि बेटा मेरी तरह मेहनत करो आऔर घर से दूर हो जाओ।

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    1. अगर घर के पास ही रहना है तो वहा ही रह जाते खेती करते या फिर और कुछ करते अब एक बार लगंने के बाद में फिर से एक ही परीक्षा से लगना कोनसी बहादुरी है ,
      लगना ही है तो इससे बड़े पद पर लग जाते अब क्यों हम बेरोजगारों को हक छीन रहे हो

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  2. भाई बात घर के पास दूर लगने की नहीं है। बात सरकार की नीतियों की है जब घर के पास पद रिक्त है तो पोस्टिंग दूर क्यों।
    क्यों यहां के व्यक्तियों को वहां और वहां के लोगों को यहां लगा रहे है।
    सब भ्रष्टाचार का खेल है। बाद में ट्रांसफर के लिए घूस भी तो लेनी है।
    रही बात बहादुरी की तो वो आपको दिखाने की जरूरत नहीं है। कोई किसी का हक नहीं छीन रहा है सब अपनी अपनी जरूरतों के लिए लड़ रहे हैं। आप भी लड़ो हम भी लडते है बस ये याद रखना कि लड़ाई सरकार से करनी है।
    पोस्टेड को कोई शौक नहीं है एक ही पद पर बार बार लगने और ना ही बार बार प्रोबेशन में पड कर कम वेतन लेने का।

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