Wednesday, 18 September 2019

शिक्षामंत्री का आश्वासन, निदेशक ने तोड़ी बेरोजगारों की नौकरी की आस.....देखे पूरा मामला

सीकर. 
कला शिक्षकों की नौकरी की राह में शिक्षा विभाग के निदेशक ने अब रोड़े अटका दिए है। एक तरफ शिक्षा राज्य मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा बेरोजगारों को लगातार पद सृजित करने का आश्वासन दे चुके हैं। दूसरी तरफ शिक्षा निदेशक की रिपोर्ट से कला शिक्षकों की खुशियों पर ग्रहण लगता हुआ नजर आ रहा है। वर्ष 2016 में उपशासन सचिव शिक्षा ग्रुप प्रथम ने माध्यमिक तक कला शिक्षा (चित्रकला व संगीत) को अनिवार्य विषय नहीं माना। और अब शिक्षा मंत्री के पत्र पर उपशासन सचिव शिक्षा ग्रुप प्रथम की ओर से निदेशक माध्यमिक शिक्षा विभाग बीकानेर ने शिक्षा विभाग की योग्यता नियमों को दरकिनार कर नया पेंच फंसा दिया गया। निदेशक के पत्र के अनुसार कला शिक्षा को छोडक़र अन्य विषय के शिक्षकों को कला शिक्षा का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जबकि बीएसटीसी व बीएड के पाठ्यक्रम में भी कला विषय शामिल हैं और राजस्थान अधीनस्थ शिक्षा सेवा नियम 1971 में कला शिक्षा विषय पदों के लिए योग्यता निर्धारित है। अनिवार्य कला शिक्षा विषय की उपेक्षा को लेकर बेरोजगार कला शिक्षकों ने शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को पिछले दिनों ज्ञापन दिया था। शिक्षा मंत्री ने निजी सचिव को पत्र जारी कर 14 जून को रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद उप शासन सचिव शिक्षा ग्रुप प्रथम ने नौ जुलाई को निदेशक माध्यमिक शिक्षा विभाग बीकानेर से वस्तु स्थिति मांगी। निदेशक नथमल डिडेल ने शिक्षा विभाग के योग्यता नियमों व मानक मापदंडों को दरकिनार कर परिपत्र में लिखा कि बीएसटीसी व बीएड पाठ्यक्रम में कला शिक्षा विषय पाठ्यक्रम में शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि निशुल्क अनिवार्य बाल अधिनियम 2009 के मानक मापदंडों के अनुसार कला शिक्षा विषय के लिए अंश कालिन शिक्षक लगाने का प्रावधान है। राजस्थान निशुल्क अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकारी अधिनियम नियम 2011 में स्कूल प्रबंधन समिति आवश्यकता अनुसार अपने स्तर पर शिक्षक रख सकती है।

शिक्षा मापदंडों के विरूद्ध आदेश
वर्तमान में उच्च प्राथमिक से लेकर माध्यमिक तक शिक्षा विभाग के मानक मापदंडों के तहत विषयवार भर्ती व पद सृजित होने के बावजूद राजस्थान में कला शिक्षा विषय का पद सृजित नही है। यही कारण है कि वर्तमान समय में कला शिक्षा का एक भी शिक्षक राजस्थान में नहीं है। जबकि निशुल्क अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 में कला विषय के शिक्षक पद का प्रावधान है। अनिवार्य कला शिक्षा विषय के लिए शिक्षकों की योग्यता अन्य विषय के साथ बीएसटीसी व बीएड योग्यता है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के मानक मापदंडों में निर्धारण नहीं है। इधर, राजस्थान अधीनस्थ शिक्षा सेवा नियम 1971 के तहत अनिवार्य कला शिक्षा विषय के द्वितीय व तृतीय शिक्षकों को योग्यता निर्धारित है। चित्रकला व संगीत कला में स्नात्तक डिग्री उसके समकक्ष डिग्री जो राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त है।

हाईकोर्ट ने दिए यह आदेश
हाईकोर्ट की डबल बैच ने इस विषय में दायर विमल शर्मा की जनहित याचिका पर 1 मई 2018 में पारित निर्णय में यह निर्देश भी दिया है। न्यायालय की ओर से पारित आदेश के अनुपालन में पूर्वोक्त निर्णय से इंकार करने के बाद, हमारा विचार है कि छात्रों को कला शिक्षा के उद्देश्य से कुछ व्यवस्था की गई हैं। लेकिन भविष्य में राज्य अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि नियमित भर्ती के संबंध में आवश्यक कार्रवाई कर कला शिक्षा देने के लिए कठोरता से कानून की पालना की जाए।
_*किस राज्य में कितने पद सृजित*_
राजस्थान को छोडक़र देश के अन्य राज्यों में कक्षा एक से 10 तक कला शिक्षा के लिए शिक्षकों के पद सृजित है। देश के इन राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों में कला शिक्षकों के पद सृजित है, और समय-समय पर भर्ती भी होती हैं। महाराष्ट्र में 15000, बैगलोर 5344, हरियाणा 2798, केरल 2135, दिल्ली 1300 से अधिक, मिजोरम 410, केवीएस 3323, एनवीएस 1250 पद सृजित है।
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